Sawan Ki  Shayari 2022 : सावन की शायरी

वो भला क्यूँ कदर करते हमारे अश्को की सुना है सावन उनके शहर पर कुछ ज्यादा मेहरबान रहता है..।।

सावन की बूंदों में झलकती है उसकी तस्वीर आज फिर भीग बैठे उसे पाने की चाहत में

जब चले जाएँगे हम लौट के सावन की तरह याद आयेंगे पहले प्यार के चुम्बन की तरह

मुझे मालूम है तूमनें बहुत बरसातें देखी है, मगर मेरी इन्हीं आँखों से सावन हार जाता है…

लाख बरसे झूम के सावन मगर वो बात कहाँ.. जो ठंडक पङती है दिल में तेरे मुस्कुराने से ..

पतझड़ दिया था वक़्त ने सौगात में मुझे.. मैने वक़्त की जेब से ‘सावन’ चुरा लिया…!!

जितना हँसा था उससे ज़्यादा उदास हूँ आँखों को इन्तज़ार ने सावन बना दिया

Shayari Credit : thesimplehelp.com

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