Essay on Udham Singh in Hindi and English Language

उद्यम सिंह पर निबंध | Essay on Udham Singh

Essay on Udham Singh
Essay on Udham Singh

दोस्तों आज हम निबंध लिखने वाले है उधम सिंह पर हिंदी और इंग्लिश मैं ये निबंध क्लास 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 के स्टूडेंट्स के और कॉलेज के स्टूडेंट्स के  उपयोग मैं आ सकता है ।

उधम सिंह के बारे मैं जानकारी

उधम सिंह का जनम हुआ है 26 दिसंबर 1899 को हुआ है । उधम सिंह का पूरा नाम है शहीद ए आज़म सरदार उधम सिंह है । उधम सिंह भारत के ही रहना वाले है । उधम सिंह का होमटाउन का बात करे तोह सुनाम , पंजाब मैं था । उन्होने कभी भी विवाह नहीं किया था । उधम सिंह का जाती का बात करे तोह दलित थे ।

उधम सिंह के पिता जी का नाम था जैसा बताया गया है सरदार टहल सिंह था और माता जी का नाम था नारायण कौर था ।  आपको ये भी बता दे की प्यार से लोग उधम को बचपन मैं शेर सिंह कर के बोलते थे उनको छोटा मैं । उनके भाई और बेहेन का नाम था बड़े भाई का नाम था मुक्ता सिंह और एक बेहेन का नाम था आषा कौर था ।

उधम सिंह एक साधारण परिवार से आते थे । बचपन मैं ही उनका आपने माँ और बाप से साया हठ गया और दोनों भाई को छोड़ कर के चले गए इस दुनिया से और दोनों भाई ने आगे जाके एक अनाथ के सरन मैं जाके जीवन को चलाया और फिर उसके बाद पढाई भी पूरी उधम सिंह ने पर एक बार और बुरा समय आया अब उनके भाई ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और इस दुनिया को छोड़ कर चले गए । कुछ दिनों के बाद अपना पढाई और काम कर के उधम सिंह ने अनाथ आश्रम को छोड़ दिया ।

उधम सिंह जब छोटे थे एक घटना उनके आँख के समाने हुआ था

उधम सिंह जब छोटे थे तब एक घटना हुआ जो की उनको झकझोर कर रख दिया । वो घटना उनके आँख के सामने हुआ था और उन सब लोग मैं से उधम सिंह बच्चे थे बाकि सब लोग मर ही चुके थे ।

एक ग्राउंड मैं सब लोग बैठे हुए थे महिला हो गयी बड़े लोग और बूढ़े लोग बच्चे और भी लोग शामिल थे । अच्चानक से एक गेट के तरफ से अंग्रेज़ ने घेर लिया और सैनिक और बन्दूक टैंकर सब लगा दिया । उसके बाद अंग्रेज़ ने आर्डर दिया और सब अंग्रेज़ के लोग पोस्टिव बना कर के गोली चालने लगे थे । और भागने के भी कोई रास्ता नहीं था और गोली चलते रही और लोग मरते गए और सब लोग बेकसूर थे और उस समय उस वक़्त उधम सिंह भी थे और पर वो छोटे थे पर उन्होंने सब अपनी आंख से देखा और निश्चित किया की उसको मार कर रहेंगे चाहे कुछ भी हो जाये ।

उधम सिंह ने वो कर के दिखाया भी करीब 20 साल लग गए थे । जिसने जलियावाला बाग़ का काण्ड करवाया था । उसको विदेश मैं जाके मार कर ही अपना दम लिए और उनका जो बचपन मैं निश्चित किया था अपना लक्ष्य वो कर के दिखया ।

4 जून 1940 को उधम सिंह को जनरल डायर के मारने के चलते उनको फास्सी दी गयी थी । पर वो अपना काम कर चुके थे । जो वो लक्ष्य और प्रण लिया था वो कर के दिखाया था ।

 

धन्यवाद ।

 

Essay on Udham Singh in Hindi and English Language

Friends, today we are going to write an essay on Udham Singh in Hindi and English, this essay is used by the students of class 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 and college students. may come.

Information about Udham Singh

Udham Singh was born on 26 December 1899. The full name of Udham Singh is Shaheed-e-Azam Sardar Udham Singh. Udham Singh is a resident of India. Talking about Udham Singh’s hometown, I was in Sunam, Punjab. He had never married. Talking about the caste of Udham Singh, he was a Dalit.

Udham Singh’s father’s name was as mentioned Sardar Tahal Singh and mother’s name was Narayan Kaur. Let me also tell you that with love, people used to call Udham as Sher Singh in childhood, I was younger to him. His brother and Behen’s name was elder brother’s name was Mukta Singh and one Behen’s name was Asha Kaur.

Udham Singh came from a simple family. In my childhood, I got stubborn from my mother and father and left both brothers and left this world and both brothers went ahead and went on to live in an orphan’s house and then completed their studies too. Once more bad times came, now his brother said goodbye to this world and left this world. After a few days, Udham Singh left the orphanage after doing his studies and work.

When Udham Singh was young, an incident happened in front of his eyes.

When Udham Singh was young, an incident happened which shook him. That incident happened in front of his eyes and all those people were Udham Singh’s children from me, all the others were already dead.

Everyone was sitting on a ground, women became older people and old people, children and more people were involved. Suddenly the British surrounded one of the gates and put all the soldiers and gun tankers. After that the British gave the order and all the British people started firing by making postives. And there was no way to escape and the bullets kept going and people kept dying and everyone was innocent and at that time Udham Singh was also there and but he was small but he saw all with his own eyes and made sure that he would be killed. No matter what happens .

It took almost 20 years for Udham Singh to show that. The one who got the Jallianwala Bagh massacre done. He took his own life only after killing him in a foreign country and showed his goal by doing what I had decided in his childhood.

On 4 June 1940, Udham Singh was hanged for killing General Dyer. But he had done his job. Whatever that goal and vow had taken, he had shown it by doing.

 

Thank you .

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