essay on rabindranath tagore in hindi | essay on rabindranath tagore in hindi wikipedia

रबिन्द्र नाथ टैगोर पैर निबंध

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जनम साल 1861 मई 7th को वेस्टबंगाल यानि कोलकाता मैं हुआ था । रबीन्द्रनाथ टैगोर बहुत ही महान कवि थे । रबीन्द्रनाथ टैगोर का एजुकेशन यानि पढाई अपनी ही घर का मास्टर जी से ली थी अलग अलग सब्जेक्ट्स मैं । रबिन्द्र नाथ टैगोर का पिता का नाम था महर्षि देवेन्द्रनाथ टैगोर  था ।  माता का नाम शारदा देवी था , रबिन्द्र का माँ का नाम । रबिन्द्र नाथ टैगोर का नाम रबीन्द्रनाथ ठाकुर से भी जाना  जाता है । जब रबिन्द्र छोटे थे तब से कवि बनाना का लक्षण देखने लगे थे । और आगे जेक रबीन्द्रनाथ टैगोर बहुत ही महान कवि बने जो की पूरा देश पॉपुलैरिटी मिली रबिंद्रनथ का नाम सब लोग जानने लगे । रबिन्द्र वो एक ऐसे पहले भारतीय है जो “गीतानजली” नामक लेखन के लिए 1913 मैं नोबेल पुरस्कार दिया गया था । रबिन्द्र नाथ के बहुत सारी नाटक , निबंध  बहुत सारी लेखन है , रबिन्द्र नाथ टैगोर एक अच्छे और सच्चे महान देश भक्त है , जो हमारे देश का लिए राष्ट्रगान की खोज की और रचना की  जन गण मन  की रचना की । रबिन्द्र बहुत ही अच्छे चित्रकार भी थे और दर्शनशात्र भी थे ।

 

रबीन्द्रनाथ टैगोर बहुत ही फेमस कवि मैं से एक थे , टैगोर कालिदास का बाद बहुत फेमस हुआ  कवि की दुनिया मैं , अपने देश को टैगोर ने बहुत कुछ दिए लेखन मैं और ना जाने कितने अच्छे चीज़ो मैं योगदान दिया , आज भी पूरी दुनिया टैगोर को याद करती है कवि की दुनिया मैं और लेखन का दुनिया मैं । उनका योग दान सबको याद है ।

जब रबिन्द्र 14 साल का थे तब  माता सारदा का मौत हो गयी थी , उन्होंने बहुत लेखन , नाटक , चित्रकार मैं और भी चीज़ो मैं उनका योगदान है उनकी बुद्धि, समझ बहुत ही जबरदस्त थी । आमोर सोनार बांग्ला , रबिन्द्र संगीत , बहुत ही ऐसे ही योगदान दिया है रबीन्द्रनाथ टैगोर ने ।

एशिया का वो पहले इंसान थे जो रबिन्द्र नाथ टैगोर को नोबेल प्राइज मिला था 1913 मैं । रबिन्द्र शान्तिनेक्टन विश्भारती यूनिवर्सिटी के संस्थापक थे साल 1902 मैं ।

1919 मैं ब्रिस्टिश ने जो किया था जलियावालाबाग नरशंहार अगेंस्ट मैं अवार्ड दिया गया था रबिन्द्र को जो की टैगोर ने वापस कर दिया था अपने देश वासिया और का प्यार और अस्नेह कर कारन अवार्ड टैगोर ने वापस कर दिया था वो अवार्ड था “nightwod ” तोह टैगोर ने वापस कर दिया था ।

रबिन्द्र जैसा सायद ही कवि कोई होगा , वो उनका कवि लिखने का तरीका जो की बहुत ही फेमस है अपने लेखन मैं टैगोर प्यार भाईचारा और न जाने स्नेह सब दर्शाते  थे और लोग को एक साथ रहने का और प्रस्यास करते थे टैगोर ।

रबिन्द्र नाथ टैगोर ने कहा मेरे देश मुझको मजबूती दी जीवन दिया , ” मैं फिर से  भारत मैं दोबारा पैदा हूँगा ” वो एक सच्चे देशप्रेमी थे ।

रबिन्दर नाथ टैगोर बहुत ही बहुत ही धार्मिक थे । रबिन्द्र नाथ टैगोर की मौत साल 1941 7th अगस्त को हुई थी । रबिन्द्र जैसा अभी तक कोई कवि नई आया है इस देश मैं । और आज भी भी रबिन्द्र नाथ टैगोर को हमलोग याद करते है ।

 

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